देवघर डीसी को हटाने के आदेश पर सियासत हुई गरम,जानें पार्टियों का स्टैंड
झारखंड: देवघर डीसी को हटाने के आदेश पर सियासत हुई गरम,जानें पार्टियों का स्टैंड <Br/> <Br/>
sanjay kumar📍 रांची, झारखंड

रांची।भारत निर्वाचन आयोग द्वारा देवघर डीसी को हटाने के आदेश पर सूबे की सियासत गरम हो गई है। झामुमो ने इसे राज्य सरकार के अधिकार और न्यायिक प्रक्रिया में आयोग का हस्तक्षेप बताया है,तो वहीं कांग्रेस ने कहा है कि फैसले से कहीं न कहीं आयोग की निष्पक्षता पर प्रश्न चिन्ह जरूर खड़ा हो गया है।अभी न तो झारखंड में कहीं अभी चुनाव नही है तो फिर ये बेहद जरूरी हो गया है कि संवैधानिक संस्थाओं के अधिकार क्षेत्र पर व्यापक बहस हो।
दूसरी तरफ विपक्षी दल भाजपा ने कहा है कि राजनीतिक पूर्वाग्रह से ग्रसित देवघर डीसी मंजूनाथ भजंत्री पर चुनाव आयुक्त ने दंडात्मक कार्रवाई करते हुए पद से हटाने और चुनाव कार्य में नहीं लगाने का जो निर्देश दिया है, इसका तत्काल पालन हो।
भारत निर्वाचन आयोग ने देवघर के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री को पद से हटाने का आदेश राज्य सरकार को दिया है और आयोग ने इसे लेकर राज्य के मुख्य सचिव को पत्र लिखा है। पत्र में आयोग ने यह भी कहा है कि मंजूनाथ भजंत्री को चुनाव के समय बिना उसकी अनुमति से उपायुक्त या जिला निर्वाचन पदाधिकारी नियुक्त नहीं किए जा सकते। आयोग ने उनके विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई भी करने के लिए कहा है।
सत्तासीन झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भारत निर्वाचन आयोग की ओर से देवघर उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री को लेकर दिए गए आदेश पर सवाल खड़े किए हैं। झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि चुनाव आयोग संवैधानिक संस्था है और उसे भाजपा के अग्रणी संगठन के तौर पर काम नहीं करने से बचना चाहिए।
भट्टाचार्य ने कहा कि भविष्य में करोड़ों मतदाताओं का विश्वास कायम रखने के लिए इस तरह के आदेश से बचना चाहिए। एफआईआर पर फैसला कोर्ट करती है, लेकिन कोर्ट में विचाराधीन मामले पर निर्वाचन आयोग का आदेश न्यायिक प्रक्रिया में उसका हस्तक्षेप माना जाएगा।
भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि राजनीतिक पूर्वाग्रह से ग्रसित देवघर डीसी मंजूनाथ भजंत्री पर चुनाव आयुक्त ने दंडात्मक कार्रवाई करते हुए पद से हटाने और चुनाव कार्य में नहीं लगाने का जो निर्देश दिया है इसका तत्काल पालन हो।पार्टी लाइन पर काम कर रहे अधिकारियों के लिए ये एक सबक है। वहीं भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि यूपीए गठबंधन के लोग जहां चुनाव जीतते हैं, वहां चुनाव आयोग उन्हें निष्पक्ष लगता है, लेकिन जब कभी भी उनके खिलाफ कार्रवाई होती है तो आयोग को कटघरे में खड़ा किया जाता है।
कांग्रेस के प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि चुनाव आयोग को सदैव सम्मान के दृष्टिकोण से एक निष्पक्ष संवैधानिक संस्था के रूप में देखा जाता रहा है। चुनाव आयोग की भूमिका चुनाव के अधिसूचना के बाद शुरू होती है और निष्पक्ष चुनाव के दृष्टिगत प्रशासनिक पदस्थापना के पूर्व सरकार चुनाव आयोग की अनुमति के बाद ही कोई फैसला लेती है और यह स्थापित परंपरा रही है। चुनाव आयोग के द्वारा देवघर उपायुक्त के संबंध में लिए गए फैसले ने कहीं न कहीं उसके निष्पक्षता पर प्रश्न चिन्ह जरूर खड़ा कर दिया है।
यूं तो देवघर उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री व गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे में कभी नहीं बनी। सांसद व उनकी धर्मपत्नी से जुड़ी जमीन-मकान को लेकर विवाद की जांच के उपरांत समय-समय पर करायी गयी प्राथमिकियों ने दूरी को और बढ़ाने का काम किया। वहीं मधुपुर विधानसभा उपचुनाव संपन्न होने के छह माह के बाद उपायुक्त के आदेश पर एक ही दिन में चार अलग-अलग थानों में सांसद के विरुद्ध पांच प्राथमिकी दर्ज कराए जाने के बाद स्थिति विस्फोटक हो गयी। सांसद के विरुद्ध नगर थाने में आदर्श आचार संहिता उल्लंघन से संबंधित एक एफआईआरसे अलावा देवीपुर थाना में दो, मधुपुर और चितरा थाना में एक-एक प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी। नगर को छोड़ सभी थानों में बीडीओ के बयान पर दर्ज मामलों में सांसद पर आम जन-मानस को भड़काने जैसे आरोपों के साथ आदर्श आचार संहिता उल्लंघन का मामला दर्ज कराया गया था। सांसद ने इस मामले को लेकर लोकसभा की विशेषाधिकार समिति में भी शिकायत की। वहीं उपचुनाव समाप्त होने के लगभग छह माह के बाद एक ही दिन में अलग-अलग थानों में पांच प्राथमिकियां दर्ज कराए जाने को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त से भी शिकायत दर्ज कराते हुए कार्रवाई की मांग की। सांसद की शिकायत के आलोक में आयोग की ओर से मामले की जांच के बाद उपायुक्त से शोकॉज भी मांगा गया था, जिसका जवाब उन्होंने निर्धारित अवधि में भेज दिया था। उसके उपरांत आयोग की ओर से झारखंड के मुख्य सचिव को पत्र भेजकर उन्हें उपायुक्त के पद से हटाने कहा गया है।
राज्य सरकार देवघर के उपायुक्त को हटाने को लेकर चुनाव आयोग के आदेश का अध्ययन कर रही है। मुख्यमंत्री के संताल से लौटने पर उनसे चर्चा के बाद सरकार मामले में आगे कोई निर्णय लेगी। जानकारी के अनुसार राज्य सरकार मामले में जल्दबाजी में निर्णय नहीं लेगी। चुनाव आयोग के इस आदेश को अब तक का सबसे अलग आदेश के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले भी अधिकारियों की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए चुनाव कार्य से दूर रखने का आदेश चुनाव आयोग देता रहा है।
संबंधित ख़बरें

कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: दो बालिग सहेलियों को साथ रहने की मिली अनुमति, कोलकाता के लिए रवाना
● ब्रेकिंग

दिल्ली में ठंड के साथ धुंध की दस्तक: सफदरजंग और पालम पर विजिबिलिटी में भारी गिरावट
● ब्रेकिंग

हरियाणा: 582 विलेज नॉलेज सेंटर, राज्य अल्पसंख्यक आयोग विधेयक समेत नायब सरकार के कई ऐतिहासिक फैसले

