टोक्यो ओलंपिक में देश के लिए कांस्य पदक जीतने और देश का मान बढ़ाने वाले पहलवान बजरंग पूनिया के लगातार आगे बढ़ने में परिवार के लोगों का बहुत बड़ा हाथ है।बजरंग लगातार मेडल जीतकर तिरंगा ऊंचा करते रहे और उनके अभ्यास में कोई परेशानी न हो इसलिए परिवार वालों ने गांव तक छोड़ दिया।बजरंग का साढ़े छह साल पहले सोनीपत के साई सेंटर में चयन हो गया था और झज्जर के गांव खुड्डन से यहां रोजाना आकर अभ्यास करना असंभव था तो यहां अकेले रहने पर भी अभ्यास पर असर पड़ता। बजरंग का अभ्यास ठीक नहीं होने से उसका मेडल जीतना भी मुश्किल था। बस यह सोचकर ही पिता बलवान सिंह व भाई हरेंद्र ने गांव छोड़ने का फैसला कर लिया। गांव में 10 एकड़ जमीन भी ठेके पर दी हुई है और पूरा परिवार बजरंग के खानपान से लेकर हर सुविधा का ध्यान रखता है।



ओलंपियन बजरंग पूनिया का परिवार पिछले साढ़े छह साल से सोनीपत में सुजान सिंह पार्क के पास रहता है। उनके परिवार में पिता बलवान सिंह के अलावा भाई हरेंद्र, मां ओमप्यारी, भाभी मोनिका व भतीजा नमन है। उनकी पत्नी संगीता पूनिया भी अंतरराष्ट्रीय पहलवान है। वह फिलहाल बैंगलुरु में रहकर अभ्यास कर रही हैं। उसकी तीन बड़ी बहन है, जिनकी शादी हो चुकी है। बजरंग के पिता बलवान सिंह की झज्जर में कृषि योग्य भूमि है और वह पहले खेती करते थे।



शुरुआती दौर में बजरंग ने चार-पांच महीने सोनीपत में अकेले रहकर अभ्यास किया लेकिन उसके अकेले रहने का अभ्यास पर असर पड़ता था और उसे अपने अन्य जरूरी कामों में समय देना पड़ता था। यह देखकर ही बजरंग के पिता व भाई ने फैसला किया कि वह भी परिवार के साथ सोनीपत में रहेंगे और वह झज्जर में अपना खुड्डन गांव छोड़कर यहां आ गए।