नई दिल्ली / ब्रसेल्स
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद एक तरफ यूरोपीय संघ (EU) रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने और उसकी ऊर्जा निर्भरता खत्म करने की बातें कर रहा है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। आंकड़ों के मुताबिक, यूरोप की कथनी और करनी में बड़ा विरोधाभास देखने को मिल रहा है। अमेरिका द्वारा रूस पर प्रतिबंधों में ढील देने पर आपत्ति दर्ज कराने वाला यूरोप खुद रूस से भारी मात्रा में लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) और पाइपलाइन गैस खरीद रहा है।
आंकड़ों की जुबानी: 9 महीने में 9.5% बढ़ा रूसी LNG का आयात
जर्मन रिसर्च ग्रुप उर्गेवाल्ड (Urgewald) और थिंक टैंक सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के ताजा आंकड़ों के अनुसार:
- 1.2 करोड़ टन का आयात: जनवरी से सितंबर 2026 के बीच यूरोपीय यूनियन के बंदरगाहों पर 1.2 करोड़ टन से ज्यादा रूसी आर्कटिक LNG पहुंची, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 9.5% अधिक है।
- सितंबर में बड़ा कारोबार: अकेले सितंबर 2026 में यूरोपीय देशों ने रूस से 81.7 करोड़ यूरो की पाइपलाइन गैस और 61.5 करोड़ यूरो की LNG का आयात किया।
कौन से यूरोपीय देश खरीद रहे हैं सबसे ज्यादा रूसी गैस?
यूरोपीय देशों में फ्रांस, नीदरलैंड्स और हंगरी रूसी गैस के सबसे बड़े खरीदार बनकर उभरे हैं:
1. LNG के सबसे बड़े खरीदार (सितंबर 2026):
- फ्रांस: 44.6 करोड़ यूरो (लगभग 44.6 मिलियन यूरो का आयात, जो पिछले महीने की तुलना में 103% अधिक है)।
- नीदरलैंड्स: 11.6 करोड़ यूरो की LNG आयात की।
2. पाइपलाइन गैस के सबसे बड़े खरीदार:
- हंगरी: 41.4 करोड़ यूरो (लगभग ₹4,300 करोड़)।
- स्लोवाकिया: ₹1,700 करोड़ की गैस।
- बुल्गारिया: लगभग ₹1,400 करोड़ की पाइपलाइन गैस।
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विरोध के बावजूद आखिर रूस से गैस क्यों खरीद रहा है यूरोप?
यूरोप की इस मजबूरी और दोहरे रवैये के पीछे कई तकनीकी और आर्थिक कारण मौजूद हैं:
- सप्लाई सिस्टम और इंफ्रास्ट्रक्चर का अंतर: कच्चे तेल के मुकाबले नेचुरल गैस की सप्लाई का तंत्र जटिल होता है। पाइपलाइन, LNG टर्मिनल, री-गैसीफिकेशन और स्टोरेज के लिए खास इंफ्रास्ट्रक्चर चाहिए। रातों-रात किसी दूसरे देश में शिफ्ट होना संभव नहीं है।
- ऊर्जा संकट और कीमतें: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ग्लोबल मार्केट में गैस की उपलब्धता में कमी के कारण यूरोप के सामने अपनी घरेलू और औद्योगिक ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की भारी चुनौती है।
- लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स: कई यूरोपीय कंपनियों के पास रूस के साथ दीर्घकालिक आपूर्ति समझौते हैं, जिन्हें तुरंत रद्द करना कानूनी और आर्थिक रूप से नुकसानदेह है।
अमेरिका ने क्यों दी प्रतिबंधों में ढील और क्यों नाराज है यूरोप?
हाल ही में अमेरिकी प्रशासन ने एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के जरिए रूसी डीजल और एनर्जी से जुड़े कुछ प्रतिबंधों में अप्रैल 2027 तक के लिए अस्थायी छूट दी है।
- अमेरिका का तर्क: ईरान और मध्य पूर्व में तनाव के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजारों में उछलती कीमतों को काबू में रखने के लिए यह कदम उठाया गया।
- यूरोप का विरोधाभास: यूरोपीय संघ ने अमेरिका के इस कदम पर यह कहकर खेद व्यक्त किया कि इससे रूस पर बनाया गया दबाव कमजोर होगा। हालांकि, जब खुद यूरोप के गैस आयात के आंकड़े देखे जाते हैं, तो उसकी यह चिंता और आलोचना पूरी तरह से विरोधाभासी नजर आती है।
LNG और पाइपलाइन गैस में क्या अंतर है?
| पैमाना | लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) | पाइपलाइन गैस |
| परिवहन माध्यम | विशेष जहाजों (LNG Tankers) द्वारा | जमीन/समुद्र के नीचे बिछी पाइपलाइनों द्वारा |
| अवस्था (State) | -162°C पर ठंडा करके लिक्विड बनाया जाता है | सामान्य गैसीय अवस्था में सप्लाई |
| सप्लाई लचीलापन | इसे किसी भी देश के बंदरगाह/टर्मिनल तक भेजा जा सकता है | केवल उन्हीं देशों में संभव जहां पाइपलाइन नेटवर्क हो |
जब तक यूरोप वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों और बुनियादी ढांचे का निर्माण पूरी तरह नहीं कर लेता, तब तक उसके लिए रूस से पूरी तरह दूरी बनाना नामुमकिन सा लगता है। ऊर्जा जरूरतों और जमीनी सीमाओं के कारण यूरोप चाहकर भी रूस से अपनी निर्भरता खत्म नहीं कर पा रहा है।





