बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार के गठन के बाद अब राज्य के राजनीतिक गलियारों में एक और बड़े प्रशासनिक बदलाव की सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर सत्ता-संतुलन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से बिहार विधान परिषद के सभापति का पद जनता दल यूनाइटेड (JDU) को सौंपने की सहमति बनती दिख रही है।
वर्तमान में यह जिम्मेदारी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अवधेश नारायण सिंह संभाल रहे हैं। माना जा रहा है कि सरकार और संवैधानिक पदों के न्यायसंगत बंटवारे के तहत जदयू इस पद पर अपनी दावेदारी को मजबूती से आगे बढ़ा रही है।
सदन में दलीय स्थिति और संतुलन का गणित
विधानसभा अध्यक्ष का पद पहले से ही भाजपा के पास है। ऐसे में उच्च सदन (विधान परिषद) का सभापति पद जदयू को देकर एनडीए दोनों प्रमुख सहयोगियों के बीच राजनीतिक बराबरी का संदेश देना चाहता है। दोनों सदनों और दलों के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति काफी हद तक संतुलित नजर आती है:
| सदनभाजपा (BJP)जदयू (JDU)अन्य/विपक्ष | |||
| विधान सभा (कुल सीटें) | 88 | 85 | राजद (RJD) व अन्य |
| विधान परिषद (कुल सीटें) | 25 | 20 | RJD (15), INC (2), निर्दलीय (7), अन्य (5) |
विधानसभा में विधायकों की संख्या में बहुत मामूली अंतर होने और भाजपा के पास मुख्यमंत्री समेत कई प्रमुख विभागों की जिम्मेदारी होने के कारण विधान परिषद के सभापति पद पर जदयू की मौजूदगी गठबंधन के भीतर दीर्घकालिक स्थिरता और आपसी तालमेल के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।





