मुंबई: लगातार चार महीनों की भारी बिकवाली के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) का भरोसा एक बार फिर भारतीय इक्विटी बाजार पर लौट आया है. जुलाई में 20,200 करोड़ रुपये के निवेश के बाद, अगस्त महीने में अब तक विदेशी निवेशकों ने 23,544 करोड़ रुपये की भारी-भरकम खरीदारी की है. इस नए पूंजी प्रवाह से घरेलू शेयर बाजार को जबरदस्त मजबूती मिली है.

2026 में FPI के निवेश और निकासी का पैटर्न

हालांकि जुलाई और अगस्त में खरीदारी बढ़ी है, लेकिन वर्ष 2026 में ओवरऑल FPI नेट सेलर ही रहे हैं और अब तक लगभग 2.3 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं.

महीनाFPI गतिविधि (करोड़ रुपये में)
मार्च 2026-1,17,000 (निकासी)
अप्रैल 2026-60,847 (निकासी)
मई 2026-32,963 (निकासी)
जून 2026-49,340 (निकासी)
जुलाई 2026+20,200 (निवेश)
अगस्त 2026+23,544 (निवेश)

क्यों बदला विदेशी निवेशकों का रुख?

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी के विजयकुमार के अनुसार, इस बदलाव के पीछे मुख्य रूप से चार कारण हैं:

  • मजबूत कॉर्पोरेट कमाई: पहली तिमाही (Q1) के नतीजों में भारतीय कंपनियों की कमाई में शानदार रिकवरी दर्ज की गई है.
  • ग्लोबल री-अलोकेशन: निवेशक वैश्विक बाजार के ‘चिप ट्रेड’ से पैसा निकालकर भारत जैसे मजबूत बाजारों में लगा रहे हैं.
  • रुपये में स्थिरता: भारतीय रुपये की स्थिति पहले से अधिक स्थिर हुई है, जिससे विदेशी निवेशकों का जोखिम कम हुआ है.
  • ऋण बाजार में दिलचस्पी: FPIs ने 'फुली एक्सेसिबल रूट' (FAR) के जरिए कर्ज बाजार में भी 852 करोड़ रुपये का निवेश किया है.

रणनीति में बदलाव: IT और बैंकिंग के बजाय मिडकैप पर फोकस

इस बार विदेशी निवेशकों का रुख पारंपरिक बड़े आईटी और बैंकिंग दिग्गजों से थोड़ा अलग है. FPIs अधिक वैल्यूएशन के बावजूद मजबूत विकास संभावनाओं वाली मिडकैप कंपनियों के शेयर चुन-चुनकर खरीद रहे हैं.

आगे कैसा रहेगा बाजार का मिजाज?

बजाज ब्रोकिंग के रिसर्च डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट पबित्रो मुखर्जी का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार की चाल कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिका-ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव पर निर्भर करेगी. यदि वैश्विक स्थितियां अनुकूल रहती हैं, तो FPI की यह खरीदारी आगे भी जारी रह सकती है.