वाशिंगटन/नई दिल्ली:

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत को संयुक्त राज्य अमेरिका का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और रणनीतिक साझेदार बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि ट्रंप प्रशासन भारत जैसे मित्र देशों पर कोई भी कड़ा टैरिफ या आर्थिक प्रतिबंध लगाने से पहले उनकी ऊर्जा जरूरतों और जमीनी प्राथमिकताओं को समझने के लिए प्रतिबद्ध है।

अमेरिकी विदेश मंत्री का यह महत्वपूर्ण बयान ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान प्रतिबंध अधिनियम' के तहत रूसी ऊर्जा आयात पर लगने वाले कड़े शुल्कों को फिलहाल टालने का फैसला किया है।

टैरिफ और दंडात्मक प्रावधानों पर 60 दिनों की रोक

'ग्राहम अधिनियम' के तहत अमेरिका उन शीर्ष आयातक देशों पर 100 प्रतिशत तक का आयात शुल्क और रूसी वस्तुओं पर 500 प्रतिशत तक दंडात्मक टैरिफ लगा सकता था, जो रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदते हैं। इनमें भारत और चीन प्रमुख आयातक देश हैं।

हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने अधिनियम की धारा 115 के तहत अपने विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए इन प्रतिबंधों पर 60 दिनों की अस्थायी रोक लगा दी है। अमेरिकी संसद (कांग्रेस) को भेजे आधिकारिक संदेश में राष्ट्रपति ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए छूट देना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। विदेश मंत्री रुबियो के अनुसार, इस 60 दिनों की अवधि का उपयोग यह आकलन करने में किया जाएगा कि इन प्रतिबंधों का वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और स्वयं अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा।

जापान/जामनगर रिफाइनरी दौरा और भारत के रुख का समर्थन

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 18 से 22 अक्टूबर तक अपने भारत दौरे पर हैं। इस यात्रा के दौरान वे मुंबई के साथ-साथ गुजरात के जामनगर स्थित विशाल तेल रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स का भी दौरा करेंगे।

भारत के वैश्विक ऊर्जा रुख का समर्थन करते हुए रुबियो ने स्वीकार किया कि भारत ने अपनी ऊर्जा आपूर्ति में विविधता लाने के लिए निरंतर और गंभीर प्रयास किए हैं। हालांकि, भारत की विशाल आबादी और तेजी से बढ़ती औद्योगिक जरूरतों के कारण रूसी तेल पर बनी निर्भरता को रातों-रात खत्म नहीं किया जा सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका को एक ऐसा व्यावहारिक संतुलन तलाशना होगा, जिससे उसके सबसे भरोसेमंद सहयोगियों के आर्थिक हित प्रभावित न हों।

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बदलता भू-राजनीतिक परिदृश्य और वैश्विक ऊर्जा संकट

विदेश मंत्री रुबियो ने कहा कि जब यह प्रतिबंध कानून संसद में तैयार किया गया था, तब से लेकर अब तक अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां काफी बदल चुकी हैं। दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति कई गंभीर संकटों और अनिश्चितताओं से गुजर रही है:

  • मध्य पूर्व में तनाव: लाल सागर और होर्मुज की जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव तथा हूती विद्रोहियों द्वारा हमलों से तेल शिपिंग प्रभावित हुई है।
  • युद्ध का प्रभाव: रूस-उक्रेन युद्ध के दौरान ऊर्जा बुनियादी ढांचों पर हमलों के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल व प्राकृतिक गैस की कीमतों में अप्रत्याशित उछाल आया है।

इन बहुस्तरीय वैश्विक जोखिमों को देखते हुए अमेरिका ने अपनी नीतियों में रणनीतिक लचीलापन दिखाते हुए भारत को राहत दी है। इसके साथ ही, हाल ही में अमेरिका और रूस के बीच हुए समझौते के तहत अमेरिका को लाखों टन डीजल ईंधन की आपूर्ति भी की जानी है।

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