रांची।झारखंड राज्य के महाधिवक्ता राजीव रंजन और अपर महाधिवक्ता सचिन कुमार पर अदालत की अवमानना करने का आपराधिक मामला चलेगा। बुधवार को झारखंड हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान में लेते हुए अवमानना का मामला चलाने का निर्देश देते हुए रजिस्ट्रार जनरल को दोनों को नोटिस भेजने का निर्देश दिया है।अदालत ने इसके साथ ही हाईकोर्ट रूल के अनुसार अवमानना का मामला चलाने के लिए मामले को खंडपीठ में स्थानांतरित कर दिया है। आपको बता दें कि झारखंड में ये पहला मामला है,जब महाधिवक्ता और अपर महाधिवक्ता के खिलाफ अवमानना का आपराधिक मामला चलाया जा रहा है।



मंगलवार को मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद जस्टिस एसके द्विवेदी की अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।बुधवार को कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा है कि 13 अगस्त को महधिवक्ता और अपर महाधिवक्ता ने जो बयान दिया, वो न्यायपालिका की गरिमा धूमिल करने वाला था।उनका कथन किसी एक जज के खिलाफ नहीं, बल्कि अदालत के खिलाफ था।अदालत को न्याय का मंदिर माना जाता है, लेकिन एक महाधिवक्ता और अपर महाधिवक्ता ने जिस तरीके से न्याय के मंदिर की भावना को चोट पहुंचायी उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।



दोनों के इस प्रतिकूल व्यवहार के बाद भी अदालत ने अपना पक्ष रखने और इस आचरण के खिलाफ माफी मांगने का अवसर दिया। दोनों को शपथपत्र दाखिल करने को कहा गया, लेकिन दोनों ने इस पर गौर नहीं किया। इसके बाद जब सुनवाई हुई तो कोर्ट में न महाधिवक्ता मौजूद थे और न ही अपर महाधिवक्ता। सरकार का पक्ष रखने के लिए किसी दूसरे सरकारी वकील को भेज दिया गया।



महाधिवक्ता और अपर महाधिवक्ता की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पक्ष रखते हुए कहा कि अवमानना का मामला नहीं चलाया जाना ही सभी के लिए अच्छा होगा। उस दिन क्या हुआ यह कोर्ट ही जानता है। हम इसके बारे में नहीं जानना चाहते हैं, लेकिन मेरा आग्रह होगा कि इस मामले को नहीं चलाया जाए। हम इसके लिए बिना शर्त माफी मांगते हैं।



कपिल सिब्बल ने कहा था कि लिखित रूप में आने पर यह कोर्ट के रिकॉर्ड पर आ जाएगा। इसलिए इस मामले को अनावश्यक नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। इस पर अदालत ने कहा कि अदालत में क्या महाधिवक्ता ऐसा व्यवहार कर सकते हैं? समस्या तो यही कि उनकी ओर से ऐसा किया गया। सवाल सिर्फ जज पर ही नहीं, बल्कि न्यायिक संस्था पर उठा है। इस मामले में शपथ पत्र दाखिल किया जाए। इस पर कपिल सिब्बल ने कहा कि प्रार्थी का आवेदन सुनवाई योग्य नहीं है।





रूपा तिर्की के मामले में पिछली सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता राजीव रंजन ने जस्टिस एसके द्विवेदी से कहा था कि उन्हें अब इस मामले की सुनवाई नहीं करनी चाहिए। महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि 11 अगस्त को मामले की सुनवाई खत्म होने के बाद प्रार्थी के अधिवक्ता का माइक्रोफोन ऑन रह गया था। वह अपने मुवक्किल से कह रहे थे कि इस मामले का फैसला उनके पक्ष में आना तय है। 200% इस मामले की CBI जांच तय है। जब प्रार्थी के वकील इस तरह का दावा कर रहे हैं, तो अदालत से आग्रह होगा कि वह इस मामले की सुनवाई नहीं करें।