लखनऊ।उत्तर प्रदेश में कांग्रेस लगभग तीन दशक से सत्ता के वनवास का दंस झेल रही है।कांग्रेस के खोए सियासी आधार को दोबारा वापस लाने के लिए प्रियंका महिलाओं के इर्द-गिर्द चुनावी एजेंडा सेट करने में जुटी हुई हैं।प्रियंका के साथ इन दिनों प्रदेश में दो महिलाएं साये की तरह साथ खड़ी हुई नजर आती हैं।प्रियंका की चाहे प्रेस कॉफ्रेंस हो या चुनावी रैली का मंच, हर जगह उनके दोनों बगल में नजर आ जाएंगी।आखिर कौन हैं ये दो महिलाएं, जो प्रियंका के साथ कंधे से कंधा मिलकर कांग्रेस को संजीवनी बूटी देने में जुटी हुई हैं।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ हर मंच पर दिखाई देने वाली इन दो महिलाओं में एक आराधना मिश्रा उर्फ मोना है तो दूसरी सुप्रिया श्रीनेत है।आराधना और सुप्रिया को प्रियंका की महिला ब्रिगेड का खास सदस्य माना जा रहा है।आराधना और सुप्रिया को सियासत विरासत में मिली है। आराधना मिश्रा उर्फ मोना कांग्रेस के दिग्गज नेता व पूर्व राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी की बेटी हैं। सुप्रिया श्रीनेत के पिता हर्षवर्धन सिंह उत्तर प्रदेश के महाराजगंज लोकसभा सीट से दो बार कांग्रेस के सांसद रहे हैं।

आइए जाने आराधना के बारे में

प्रियंका की करीबी माने जाने वाली आराधना मिश्रा उर्फ मोना उत्तर प्रदेश में कांग्रेस विधायक दल की नेता हैं और प्रतापगढ़ जिले की रामपुर खास विधानसभा से दूसरी बार कांग्रेस की विधायक हैं।आराधना ने अपने सियासी रास्ते के सफर को पिता प्रमोद तिवारी की उंगली पकड़कर शुरू किया है।आराधना विधायक बनने से पूर्व पंचायत चुनाव में अपनी किस्मत आजमाई और बीडीसी सदस्य बनीं और ब्लॉक प्रमुख भी बनीं। पंचायत चुनाव से जमीनी स्तर की राजनीतिक के अनुभव के बाद आराधना अपने पिता की प्रतापगढ़ जिले की रामपुर खास सीट से दो बार विधायक चुनी गईं। आराधना अब तीसरी बार चुनावी मैदान में उतरेंगी।

सियासत मिली विरासत में

आराधना मिश्रा उर्फ मोना का जन्म 20 अप्रैल, 1974 को हुआ।आराधना ने अपनी पढ़ाई इलाहाबाद विश्वविद्यालय में की,जहां से बीकॉम करने के बाद उ
एमबीए भी किया।आराधना ने दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन राइट्स से मानवाधिकार विषय में पीजी भी कर रखी हैं।आराधना उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले की रामपुर खास विधानसभा से 1980 से 2013 तक लगातार कांग्रेस विधायक चुने गए दिग्गज नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद विकास पुरुष प्रमोद तिवारी की बेटी हैं।

आराधना ने साल 2000 में उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की सदस्य बनीं।इसके बाद 2001 में पहली बार ब्लॉक प्रमुख बनीं और लगातार तीन बार विजयी हुईं।प्रमोद तिवारी के विधायक पद से इस्तीफा देने के बाद 2014 में रामपुर खास सीट पर उपचुनाव में जीत का परचम लहरा कर विधायक बनीं। 2017 में दूसरी बार भी जीत का परचम लहराया।आराधना को अक्टूबर 2019 में कांग्रेस विधायक दल का नेता चुना गया।आराधना उत्तर प्रदेश विधानसभा में किसी भी विपक्षी दल की नेता चुनी जाने वाली पहली महिला हैं।आराधना 2022 विधानसभा के चुनाव में प्रियंका गांधी की टीम की खास सदस्य हैं और महिला एजेंडे को धार दे रही हैं।

उत्तर प्रदेश में प्रियंका के साथ सुप्रिया श्रीनेत कंधे से कंधा मिलाकर पार्टी के लिए सूखी पड़ी हुई सियासी जमीन को उपजाऊ बनाने में जुटी हैं। सुप्रिया कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं।सुप्रिया काफी तेजतरार हैं और टीवी डिबेट में कांग्रेस पार्टी का पक्ष मजबूती के साथ रखती हैं। 2022 यूपी विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की बनी घोषणापत्र कमेटी की खास सदस्य भी हैं।प्रियंका ने महिलाओं के लिए बुधवार को घोषणा पत्र जारी किया है उस घोषणा पत्र को मूर्तरूप देने में सुप्रिया की खास भूमिका रही है। सुप्रिया ने प्रदेश में जगह-जगह जाकर महिलाओं से मिलकर उनके सवाल और मुद्दों को कांग्रेस के घोषणापत्र में शामिल कराया है।

सियासत मिली विरासत में

कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत का जन्म 27 अक्टूबर 1977 में हुआ था।सुप्रिया हर्षवर्धन सिंह की बेटी है। सुप्रिया ने अपनी स्कूली शिक्षा लॉरेटो कॉन्वेंट स्कूल लखनऊ से पूरी की है।इसके बाद सुप्रिया ने स्नातक और परास्नातक की शिक्षा हासिल की और इसके बाद पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना करियर बनाने का फैसला किया। सुप्रिया के भाई राज्यवर्धन सिंह का 2015 में निधन हो गया।परिवार इस सदमे से उबर ही रहा था कि साल 2016 में सुप्रिया के पिता हर्षवर्धन सिंह की भी मौत हो गई. ऐसे में पिता की राजनीतिक विरासत संभालने के लिए सुप्रिया श्रीनेत को सियासत में कदम रखना पड़ा।

सुप्रिया श्रीनेत के पिता कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे हैं और पूर्वांचल की महाराजगंज लोकसभा सीट से दो बार सांसद रह चुके हैं. ऐसे में सुप्रियो श्रीनेत राजनीति में कदम रखने से पहले पत्रकारिता से जुड़ी हुई थी. पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 17 सालों तक काम करने के बाद 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले राजनीति में कदम रखा. महाराजगंज संसदीय सीट से चुनाव लड़ी, लेकिन जीत नहीं सकीं. हालांकि, पार्टी ने उनकी काबिलियत को देखते हुए उन्हें कांग्रेस का राष्ट्रीय प्रवक्ता नियुक्त कर दिया. 2022 यूपी चुनाव के लिए वह कांग्रेस की घोषणापत्र कमेटी की सदस्य हैं और अब प्रियंका गांधी के महिला एजेंडा को धार दे रही हैं.