लखनऊ।उत्तर प्रदेश की राजनीति में रामचरितमानस का मुद्दा गरमाया हुआ है।इस मुद्दे पर जहां भाजपा और सपा आमने सामने हैं तो वहीं पूर्व मुख्यमंत्री बसपा मुखिया मायावती इसको लेकर दोनों ही राजनीतिक दलों पर हमला करने में नहीं चूक रही हैं।इसी बीच योग गुरु बाबा रामदेव के इस्लाम और मुस्लिमों पर दिए गए एक बयान पर बवाल मच गया है। मुस्लिम धर्मगुरुओं ने जहां बाबा रामदेव के बयान की आलोचना की तो वहीं समाजवादी पार्टी के संभल से सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने आरोप लगाया कि रामदेव भाजपा को फायदा पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।इतना ही नहीं बर्क ने बाबा रामदेव को कुरान पढ़ने की सलाह भी दे डाली।
बता दें कि योग गुरु बाबा रामदेव ने राजस्थान के बाड़मेर में आयोजित एक धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा था कि इस्लाम धर्म का मतलब सिर्फ नमाज पढ़ना है। मुसलमानों के लिए सिर्फ नमाज पढ़ना जरूरी है और नमाज पढ़ने के बाद कुछ भी करो, सब जायज है।चाहे हिंदुओं की लड़कियों को उठाओ, चाहे जिहाद के नाम पर आतंकवादी बनकर जो मन में आए वो करो, लेकिन दिन में 5 बार नमाज पढ़ो फिर सब जायज होता है।इस्लाम धर्म का मतलब सिर्फ नमाज है, उनको यही सिखाया जाता है कि जो भी करना है करो मगर 5 बार नामाज पढ़ लो फिर सब जायज है। मुसलमानों के लिए सिर्फ नमाज पढ़ना जरूरी है। उनका स्वर्ग का मतलब है टखने के ऊपर पायजामा पहनो, मूंछे कटवा लो और दाढ़ी बढ़ा लो टोपी पहन लो।रामदेव ने ईसाई धर्म पर बोलते हुए कहा कि दिन में चर्च जाकर मोमबत्ती जलाओ, सारे पाप धुल जाएंगे, लेकिन हिंदू धर्म में ऐसा कुछ नहीं होता।सनातन धर्म के बारे में कहा कि ब्रह्म मुहूर्त में जागो,ईश्वर को याद करो,योग, ध्यान और सेवा करो।यही सनातन धर्म है।
सपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने कहा कि बाबा रामदेव फर्जी बातें कर रहे हैं उनको इस्लाम के बारे में कुछ पता नहीं है। बाबा रामदेव को कुरान शरीफ पढ़ना चाहिए।बर्क ने कहा कि ऐसे बयान देकर बाबा रामदेव भाजपा को फायदा पहुंचाने की प्रयास कर रहे हैं।वे लोगों को धोखे में लाकर भाजपा की मदद कर रहे हैं और 2024 चुनाव में जीत दिलाने चाहते हैं।
सपा सांसद शफीकुर्रहमान ने कहा कि राहुल गांधी ने जो मेहनत की है, उससे भाजपा को खतरा है।अगर मुसलमान गुनाह करता है तो उसे इस दुनिया में सजा मिलेगी और मरने के बाद भी सजा मिलेगी।बर्क ने कहा कि मजहब और राजनीति अलग है। मजहब के रास्ते में सियासत को लाना ठीक नहीं है।सियासत और मजहब अलग-अलग है।
मुस्लिम स्कॉलर मौलाना सूफियान निजामी ने कहा कि हमारे मुल्क में एक फैशन चला है।धर्म संसद के नाम पर अधर्म की बातें फैलाई जाएं और वहां पर मुसलमानों और इस्लाम पर छींटाकशी की जाए।धार्मिक लोगों का और धर्म संसद का यह मकसद नहीं होता है कि किसी के भी मजहब के खिलाफ या मुसलमानों के खिलाफ कोई टिप्पणी की जाए।मौलाना ने कहा कि अगर आपके पास अपने मजहब की कुछ अच्छी बातें हैं तो आप वह लोगों तक पहुंचाने का काम करें। बिना जरूरत दूसरे मजहब खास तौर पर मुसलमानों पर जो टिप्पणी की जा रही हैं, वह किसी भी सूरत में यह मुनासिब नहीं है।
मौलाना ने कहा कि जहां तक बाबा रामदेव की बात है, यह उनको खुद तय करना है वह धर्मगुरु हैं या व्यापारी हैं, या एक राजनेता हैं,क्योंकि जिस तरीके की जुबान इस्तेमाल कर रहे हैं यकीनी तौर पर वह किसी धार्मिक या साधु संत से ताल्लुक रखने वाले संत समाज की नहीं हो सकती। यह राजनीतिक व्यक्ति की जुबान हो सकती है।
देवबंदी उलेमा मुफ्ती असद कासमी ने कहा कि ऐसे लोग धर्म गुरु कहलाने के लायक नहीं हैं।उन्हें मुसलमानों से माफी मांगनी चाहिए।अगर वे माफी नहीं मांगते तो देश के मुसलमानों से अपील है कि वे पतंजलि के सभी प्रोडक्ट का बायकॉट करें।





