नई दिल्ली: अगर आपने होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन या किसी भी प्रकार का क्रेडिट लिया है, तो हर महीने समय पर EMI (समान मासिक किस्त) चुकाना आपकी वित्तीय सेहत के लिए बेहद जरूरी है। कई बार बैंक खाते में अपर्याप्त बैलेंस, तकनीकी खराबी या भूल जाने के कारण EMI तय तारीख पर जमा नहीं हो पाती। ऐसे में लोन लेने वाले ग्राहकों के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या सिर्फ 1 दिन की देरी से भी उनका क्रेडिट स्कोर (CIBIL Score) खराब हो सकता है?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशानिर्देशों और बैंकिंग विशेषज्ञों के अनुसार, एक दिन की देरी से क्रेडिट स्कोर में तुरंत भारी गिरावट आए यह जरूरी नहीं है, लेकिन इसका असर आपके पेनल्टी चार्जेस और भविष्य के लोन ट्रैक रिकॉर्ड पर जरूर पड़ सकता है।

1 दिन की देरी पर क्या कहता है RBI का नियम?

RBI के नियमानुसार, यदि लोन की किस्त तय तारीख की मध्यरात्रि तक बैंक के पास जमा नहीं होती है, तो उस लोन अकाउंट को 'ओवरड्यू' (Overdue) की श्रेणी में मान लिया जाता है।

  • लेट पेमेंट चार्ज (Penal Charges): EMI भरने में सिर्फ 1 दिन का विलंब होने पर भी बैंक या गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) आपसे 'लेट पेमेंट फीस' या पेनल्टी वसूल सकती है।
  • पारदर्शिता और ब्याज: RBI के नियमों के अनुसार, बैंकों को लोन देते समय ही लेट फीस और जुर्माने से जुड़ी शर्तें साफ बतानी होती हैं। ये चार्ज वाजिब होने चाहिए और बैंक पेनल्टी की रकम पर फिर से अतिरिक्त ब्याज नहीं जोड़ सकते (हालांकि सामान्य लोन ब्याज जारी रहता है)।

क्रेडिट स्कोर पर कितने दिन में और कितना पड़ता है असर?

वित्तीय मामलों के जानकारों और क्रेडिट ब्यूरोज़ के अनुसार, 1 दिन की देरी का सिबिल स्कोर पर असर बैंक के रिपोर्टिंग शेड्यूल और आपकी पुरानी पेमेंट हिस्ट्री पर निर्भर करता है:

  1. 1 से 30 दिन की देरी: यदि किसी ग्राहक का पिछला रीपेमेंट रिकॉर्ड बहुत साफ-सुथरा रहा है, तो 1 दिन की देरी से क्रेडिट स्कोर में अचानक कोई बड़ा भूचाल नहीं आता। हालांकि, अगर यह गलती बार-बार दोहराई जाती है, तो बैंक आपकी क्रेडिट हिस्ट्री में 'देरी से भुगतान' (Late Payment) दर्ज कर सकता है।
  2. 30 दिन से अधिक की देरी: अगर ईएमआई 30 दिनों से ज्यादा समय तक बकाया (Overdue) रह जाती है, तो क्रेडिट ब्यूरो (जैसे CIBIL, Experian) इसे गंभीर डिफ़ॉल्ट मानकर आपके क्रेडिट स्कोर में बड़ी कटौती कर देते हैं।

15 दिनों में क्रेडिट डेटा अपडेट होने का नया नियम

लोन डिफॉल्ट और देरी को लेकर नियम अब पहले से ज्यादा सख्त हो चुके हैं:

  • 1 जनवरी 2025 से नया नियम: RBI के नए निर्देशों के तहत, सभी बैंकों और लोन देने वाली संस्थाओं को क्रेडिट ब्यूरो (Credit Information Companies) के साथ ग्राहकों की क्रेडिट जानकारी हर 15 दिन में (पखवाड़े पर) शेयर/अपडेट करनी होती है।
  • तेजी से दिखेगा असर: पहले जहां डेटा महीने में एक बार अपडेट होता था, वहीं अब 15-15 दिनों में रिपोर्टिंग होने की वजह से ईएमआई में हुई कोई भी देरी या डिफॉल्ट क्रेडिट ब्यूरो के पास बहुत तेजी से दर्ज हो जाता है।

ईएमआई मिस होने पर क्या करें? (सुरक्षात्मक उपाय)

यदि किसी वजह से आपकी EMI मिस हो जाती है, तो तुरंत ये कदम उठाएं:

  • तत्काल भुगतान करें: तय तारीख निकलते ही अगले ही दिन मैन्युअल तरीके से (Net Banking या App के जरिए) भुगतान पूरा करें।
  • बैंक को सूचित करें: यदि देरी किसी तकनीकी वजह या ऑटो-डेबिट फेल होने से हुई है, तो बैंक कस्टमर केयर को तुरंत ईमेल/मैसेज कर इसकी जानकारी दें और लेट फीस माफ़ करने का अनुरोध करें।
  • पर्याप्त बैलेंस रखें: ईएमआई की तारीख से कम से कम 1-2 दिन पहले अपने सेविंग्स अकाउंट में पर्याप्त बैलेंस सुनिश्चित करें।

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