नई दिल्ली / बीजिंग: चीन के उत्तर-पश्चिमी शिनजियांग प्रांत को लेकर चीन और तुर्की के नागरिकों के बीच एक बार फिर विवाद गहरा गया है। इस बार विवाद का केंद्र उइघुर मुस्लिमों की जातीय पहचान, उनकी ऐतिहासिक जड़ें और इस क्षेत्र पर किए जाने वाले दावे हैं। हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शुरू हुई एक बहस ने दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और राजनीतिक तनाव को सतह पर ला दिया है।

एक सोशल मीडिया पोस्ट से कैसे भड़का विवाद?

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, विवाद की शुरुआत तब हुई जब तुर्की के एक सोशल मीडिया यूजर ने शिनजियांग की एक उइघुर युवती से अपनी बातचीत का अनुभव साझा किया। यूजर ने लिखा कि वह युवती देखने में पारंपरिक चीनी नहीं लग रही थी। जब उससे पूछा गया कि क्या वह खुद को तुर्किक (Turkic) मानती है, तो उसने जवाब दिया, "नहीं, मैं चीनी हूं।" इस पर तुर्की यूजर ने उसे अपनी ऐतिहासिक जड़ों की ओर लौटने की सलाह दी।

यह पोस्ट देखते ही देखते वायरल हो गई और इसे 20 लाख से अधिक बार देखा गया। यद्यपि बाद में वह अकाउंट डिलीट कर दिया गया, लेकिन चीनी और तुर्की यूजर्स के बीच कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित अनुवाद टूल्स की मदद से तीखी बहस छिड़ गई।

'तुर्किस्तान' शब्द और तुर्की के पाठ्यपुस्तकों पर विवाद

इस विवाद का सबसे संवेदनशील पहलू ऐतिहासिक क्षेत्र 'तुर्किस्तान' (Turkestan) शब्द का प्रयोग है। ऐतिहासिक रूप से मध्य एशिया के उन क्षेत्रों को 'तुर्किस्तान' कहा जाता था जहाँ तुर्की भाषा बोलने वाले समुदाय रहते थे।

हाल ही में तुर्की की नई पाठ्यपुस्तकों में 'मध्य एशिया' के स्थान पर 'तुर्किस्तान' शब्द का उपयोग किया गया है। इन किताबों के नक्शे में शिनजियांग के साथ-साथ चीन के पड़ोसी प्रांतों—गांसु और किंघाई—के कुछ हिस्सों को भी शामिल दिखाया गया है। चीन इसे अपने क्षेत्रीय अधिकारों, इतिहास और संप्रभुता के लिए सीधी चुनौती मानता है। बीजिंग का तर्क है कि सांस्कृतिक या भाषाई समानता के आधार पर किसी क्षेत्र को दूसरे देश के इतिहास से नहीं जोड़ा जा सकता।

कौन हैं उइघुर मुस्लिम और क्या है उनका इतिहास?

शिनजियांग चीन का एक विशाल उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र है, जहाँ लगभग 1.2 करोड़ उइघुर और अन्य अल्पसंख्यक समुदाय निवास करते हैं।

  • सांस्कृतिक जड़ें: उइघुर समुदाय मुख्यतः तुर्की भाषा बोलने वाला मुस्लिम समुदाय है, जिनकी भाषा, रीति-रिवाज और संस्कृति मध्य एशियाई तुर्किक परंपराओं से गहराई से जुड़ी है।
  • तुर्की में उपस्थिति: तुर्की में हजारों उइघुर शरणार्थी रहते हैं, जो इसे मध्य एशिया के बाहर उइघुर समुदाय का सबसे बड़ा प्रवासी केंद्र बनाता है।
  • मानवाधिकार बनाम राष्ट्रीय सुरक्षा: तुर्की लंबे समय से शिनजियांग में उइघुरों के मानवाधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर आवाज उठाता रहा है। दूसरी ओर, चीन का कहना है कि शिनजियांग में उसकी सख्त नीतियां आतंकवाद, धार्मिक कट्टरपंथ और अलगाववाद से निपटने के लिए हैं।

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कूटनीतिक रिश्ते और व्यापारिक संतुलन

शिनजियांग मुद्दे पर वैचारिक मतभेदों के बावजूद चीन और तुर्की के द्विपक्षीय संबंधों में आर्थिक और रणनीतिक वजहों से संतुलन बना हुआ है।

तुर्की अपनी अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए चीन के भारी निवेश और व्यापार का इच्छुक है। तुर्की के विदेश मंत्री हकन फिदान ने शिनजियांग का दौरा भी किया था, जहाँ आतंकवाद विरोधी सहयोग पर सहमति बनी थी। इसके अलावा, शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन की मुलाकात में पारस्परिक राजनीतिक भरोसे को मजबूत करने पर बल दिया गया था।

बहरहाल, ऑनलाइन मंचों पर पहचान और इतिहास को लेकर भड़का यह ताजा विवाद यह स्पष्ट करता है कि कूटनीतिक समझौतों के बावजूद सांस्कृतिक पहचान और संप्रभुता का यह मुद्दा दोनों देशों के आम नागरिकों के बीच अत्यंत संवेदनशील बना हुआ है।

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