दिल्ली के हाई-प्रोफाइल साउथ कैंपस इलाके में स्थित सत्य निकेतन की जर्जर इमारत ढहने के हाई-प्रोफाइल हादसे में दिल्ली पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। मामले की जांच में जुटी पुलिस टीम ने मुख्य आरोपी और इमारत के मालिक हरिराम गुप्ता की गिरफ्तारी के बाद अब उनकी पत्नी उर्मिला और बेटे महेश गुप्ता को भी सलाखों के पीछे भेज दिया है। इस दर्दनाक हादसे में हुए भारी जान-माल के नुकसान के बाद से ही पूरा परिवार फरार चल रहा था।
मालिक की त्रिस्तरीय तिकड़म का पर्दाफाश
पुलिस जांच में संपत्ति की कानूनी स्थिति और उसके प्रशासनिक ढांचे का बड़ा खुलासा हुआ है। प्राथमिक जांच के अनुसार, आरोपियों ने जिम्मेदारी से बचने के लिए व्यवस्था को कई परतों में बांट रखा था:
- कागजी मालिकाना हक: दस्तावेज खंगालने पर पता चला कि विवादित संपत्ति का मालिकाना हक कागजों पर हरिराम गुप्ता की पत्नी उर्मिला के नाम दर्ज है।
- उपयोग और सेवाएं: इमारत में लगा बिजली कनेक्शन हरिराम गुप्ता के नाम पर जारी किया गया था।
- प्रबंधन एवं किराया वसूली: इमारत का दैनिक रखरखाव, अवैध निर्माण का निरीक्षण और व्यावसायिक प्रबंधन का सारा काम बेटा महेश गुप्ता संभाल रहा था।
भिवाड़ी से शुरू हुई थी धरपकड़
हादसे के तुरंत बाद प्रशासनिक शिकंजा कसते देख पूरा गुप्ता परिवार अपने ठिकाने बदल-बदल कर पुलिस को चकमा दे रहा था। दिल्ली पुलिस ने कई राज्यों में दबिश देने के बाद मुख्य आरोपी हरिराम गुप्ता को राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार किया था। उनसे मिली इनपुट और तकनीकी निगरानी के आधार पर अब पुलिस ने पत्नी उर्मिला और बेटे महेश को भी गिरफ्तार कर लिया है।
जांच में कसता शिकंजा
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तीनों की संलिप्तता और लापरवाही के स्पष्ट सबूत मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई है। मानक सुरक्षा नियमों को ताक पर रखकर कराए जा रहे अवैध निर्माण और लापरवाही से कई निर्दोष लोगों की जान जोखिम में पड़ी। पुलिस अब तीनों आरोपियों को रिमांड पर लेकर विस्तृत पूछताछ की तैयारी कर रही है ताकि निर्माण संबंधी अनियमिताओं और इसमें शामिल अन्य संभावित चेहरे भी सामने आ सकें।





