वाराणसी।बाबा श्री काशी विश्वनाथ को सावन माह सबसे प्रिय है,क्योकि चारो तरफ हरियाली ही हरियाली,डाल-डाल पर फूल और जल से भरी नदियां और तालाब ये सब बाबा भोलेनाथ को मन को खुश कर देता है।प्रकृति शक्ति का स्वरूप है और जब शक्ति स्वरूप श्रृंगार के रूप में बाबा भोलेनाथ के सामने होती हैं तो वो मनमुग्ध होकर झूम उठते हैं।बाबा भोलेनाथ खुश होकर अपने भक्तों पर कृपा की बारिश करते हैं।सावन के महीने में बाबा भोलेनाथ की विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की जाती है।बाबा भोलेनाथ का प्रिय मलमास माह है और इसमें भी सबसे खास सोमवार हैं।हर सोमवार को बाबा भोलेनाथ का दर्शन महत्वपूर्ण माना जाता हैं।मलमास माह में हर सोमवार बाबा भोलेनाथ की अलग-अलग तरह झांकी सजाई जाती है।आज सावन का आखिरी सोमवार है और विशेष दिन है।श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा भोलेनाथ की रुद्राक्ष से श्रृंगार झांकी सजाई जाएगी और गर्भगृह के साथ-साथ पूरा परिसर रुद्राक्ष मय हो जाएगा।बाबा भोलेनाथ की रुद्राक्षमय झांकी तो परिसर के कोने-कोने में रुद्राक्ष के मालाओं की लड़ियां बनाई जाएंगी। दर्शन तो रविवार रात से लगी सोमवार की भोर में मंगला आरती के बाद ही शुरू हो जाएगा लेकिन शाम को श्रृंगार भोग आरती से ठीक पहले रुद्राक्ष झांकी सजेगी और भक्तजन विशेष दर्शन पाएंगे।

आपको बताते चले कि सावन 25 जुलाई से शुरू हुआ था और दूसरे ही दिन पहले सोमवार पर बाबा भोलेनाथ की मंदिर के गर्भगृह में बाबा भोलेनाथ स्वरूप में झांकी सजाई गई थी।दो अगस्त को दूसरे सोमवार पर बाबा भोलेनाथ मां पार्वती के साथ श्रृंगार रूप में गर्भगृह में विराजमान हुए थे।तीसरे सोमवार नौ अगस्त को बाबा भोलेनाथ ने अर्धनारीश्वर स्वरूप का दर्शन दिया।अब अंतिम सोमवार को रुद्राक्ष झांकी से बाबा भोलेनाथ अपने भक्तों को मनमुग्ध करेंगे। 22 अगस्त को सावन पूर्णिमा पर जहां एक तरफ भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक पावन पर्व रक्षाबंधन मनाया जाएगा तो वही दूसरी ओर बाबा भोलेनाथ मां पार्वती और पहले पूज्य गणेश के साथ गर्भगृह में झूले पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे।