उत्तर प्रदेश 2022 विधानसभा चुनाव को लेकर सावन की रिमझिम फुहारों के बीच राजनीतिक सरगर्मी बढ़ती जा रही है। इस बीच प्रदेश में हिन्दू देवी-देवताओं की एंट्री हो गयी है।वैसे तो प्रदेश की राजनीतिक सियासत में एक नया भूचाल पहले ही ब्राह्मणों के नाम पर सामने आ चुका है।
कासगंज में प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन में आज बसपा के राष्ट्रीय महासचिव राज्यसभा सांसद सतीश चंद्र मिश्रा पहुंचे हुए हैं।सतीश चंद्र मिश्रा ने सूबे की योगी सरकार पर चुनावी निशाना साधते हुए उत्पीड़न के कई कारनामे सामने रखें,वही बिकरु कांड का हवाला देते हुए ब्राह्मणों के ऊपर हो रहे अत्याचारों की बात कही।सतीश चंद्र मिश्रा ने अपने संबोधन में सैकड़ों बार ब्राह्मण का नाम लेकर ब्राह्मण वोट बैंक साधने की कोशिश करते हुए नजर आये। सतीश मिश्रा ने कहा कि प्रदेश में लगभग 16.5 प्रतिशत हिस्सेदारी ब्राह्मणों की है,वही 23 प्रतिशत हिस्सेदारी दलित समाज की है अगर दलित और ब्राह्मण मिल जाएंगे तो प्रदेश में मायावती जी को मुख्यमंत्री बनने से कोई नहीं रोक सकता है। वही इस प्रबुद्ध सम्मेलन में सबसे खास बात यह रही कि मंच पर हिंदू देवी-देवताओं की स्वरूप में बजरंगबली माता दुर्गा एवं परशुराम ने भी एंट्री कर ली है।एंट्री करते हुए मंच पर पहुंचे माता दुर्गा के स्वरूप ने त्रिशूल परशुराम जी ने फरसा और बजरंगबली ने अपनी गदा प्रतीकात्मक चिन्ह के रूप में भेंट किए। वही सदियों से उपेक्षा का शिकार रही शूकर क्षेत्र के बारे में बोलते हुए कहा अगर हमारी सरकार बनती है तो सोरों को तीर्थ नगरी का दर्जा दिलवाया जाएगा। वही आपको बताते चलें इससे पहले एटा से अलग कर कासगंज को एक अलग जिला कांशीरामनगर के रूप में बनाया गया था।





