सहारनपुर।अगर व्यक्ति को किसी तरह का न्याय चाहिए तो उसे कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ता है।चाहे कोई मौसम हो या फिर चाहे कैसी भी कमी हो।एक ऐसा ही मामला पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले से सामने आया है,जहां प्रवीण कुमार अपने अस्तित्व को बचाने के लिए जंग लड़ रहे हैं।प्रवीण कुमार को सहारनपुर से दिल्ली सुप्रीम कोर्ट पहुंचना है और इसकी दूरी दो सौ किलोमीटर है। प्राप्त जानकारी के अनुसार मामला इस्लामिक दावा सेंटर के अध्यक्ष मुफ्ती काजी जहांगीर कासमी और मोहम्मद उमर गौतम की गिरफ्तारी से जुड़ा हुआ है।कथित रूप से इस्लाम में परिवर्तित किए गए हजार लोगों की सूची में प्रवीण कुमार का नाम गलत तरीके से शामिल हो गया है।सूची में नाम होने से प्रवीण का जीवन नरक बन गया है। प्रवीण कुमार को अपना सम्मान वापस पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करनी है।बैरहाल प्रवीण कुमार को पिछले माह यूपी एटीएस ने क्लीन चिट दे दी थी,लेकिन प्रवीण कुमार अभी भी बहुत परेशान है। प्रवीण कुमार का गांव वाले उत्पीड़न कर रहे हैं। प्रवीण कुमार का कहना कि वो एक हिंदुत्ववादी नेता है।हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर किताबें लिखी हैं। हिंदू राष्ट्रवादी होने के बाद भी हमारा नाम धर्म परिवर्तन वाली सूची में आने के बाद सामाजिक बहिष्कार हो गया है।हमे लगातार धमकियां दी जा रही हैं। मैं चाहता हूं कि देश को पता चले कि मैं किस दौर से गुजर रहा हूं। आपको बता दें कि प्रवीण कुमार ने मंगलवार को अपने विरोध मार्च की शुरुआत की है और बुधवार शाम तक 32 किमी चलकर मुजफ्फरनगर पहुंच गए थे। 32 वर्षीय प्रवीण कुमार को आशा है कि वो 11 दिनों में अपनी यात्रा पूरी कर लेंगे।यूपी एटीएस ने अब्दुल समद की तलाश में 23 जून को प्रवीण कुमार को पकड़ा। कथित धर्मांतरितों की लीक सूची में प्रवीण कुमार की तस्वीर और उस पर जानकारी के साथ एक प्रमाण पत्र था। इस प्रमाणपत्र में लिखा था कि प्रवीण कुमार ने इस्लाम धर्म अपना लिया था और अब वह अब्दुल समद हैं। जिसे साबित करने के लिए प्रवीण को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करनी है।
सुप्रीम कोर्ट में सच साबित करने दो सौ किमी पैदल चल पड़े प्रवीण
सुप्रीम कोर्ट में सच साबित करने दो सौ किमी पैदल चल पड़े प्रवीण <Br/> <Br/>
sanjay kumar📍 अन्य, उत्तर प्रदेश

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