लखनऊ।राजनीति की दुनिया मे कल्याण सिंह जी अपने अलग ही अंदाज के लिए जाने जायेंगे,बेशक भले ही उन्होंने शरीर को छोड़ दिया है,लेकिन उत्तर प्रदेश के 90 के दशक के लोगो के दिलों और दिमाग मे हमेशा बने रहेंगे। 90 के दशक में शिक्षा व्यस्था बहुत ही जर्जर हालत में पहुंच चुकी थी।इसमें व्यापक सुधार की जरूरत देखी जा रही थी,लेकिन कोई भी इस तरफ कदम उठाना ही नही चाहता था।इसके बाद में कल्याण सिंह जी ने उत्तर प्रदेश में होने वाली परीक्षाओं पर सख्ती दिखाते हुए हर परीक्षा केंद्र पर केंद्रीय पुलिस बल की तैनाती की और नकल माफियाओं के कनेक्शन को ध्वस्त किया। यूपी पुलिस के बदायूं जनपद में तैनात सीओ अनिरुद्ध सिंह बताते है नकल माफियाओं के ऊपर नकेल कसते हुए मैं भी उस वक्त 12 वीं में फेल हुआ था,लेकिन अगर मैं फेल नही हुआ होता तो आज मैं पुलिस की नौकरी में नही पहुंच पाता।
जब एसटीएफ का किया गया गठन
90 के दशक में आतंक का पर्याय बने श्रीप्रकाश शुक्ला ने सीएम कल्याण सिंह को मारने के लिए 6 करोड़ की सुपारी ले ली थी।उसके बाद में जब ये बात कल्याण सिंह को पता चला तो उन्होंने 4 मई 1998 को एसटीएफ का गठन करवाया। उसके बाद में एसटीएफ ने श्री प्रकाश शुक्ला को ढूढ़ने के लिए व्यापक अभियान चलाया।इस अभियान में श्री प्रकाश शुक्ला को ढूढ़ने के लिए एसटीएफ पूर्वांचल,बुंदेलखंड,रुहेलखंड चंबल आदि में काफी ढूढ़ने की कोशिश की और अंततः दिल्ली से सटे गाजियाबाद में 23 सितंबर 1998 को गाजियाबाद में श्रीप्रकाश को एनकाउंटर में ढेर कर दिया गया।ये स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह बाबूजी की ही देन है।





