हिसार: हरियाणा में गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण का जिम्मा निजी कंपनी को सौंपने के सरकार के फैसले के विरोध में बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों का साझा मोर्चा मुखर हो गया है। इस हड़ताल के चलते आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है और हिसार सर्कल के 355 क्षेत्रों में लगातार 24 घंटों से अधिक समय तक पूर्ण ब्लैकआउट की स्थिति बनी रही।

वीरवार सुबह 8 बजे से ही विद्युत सदन के गेट नंबर-4 और राजगढ़ रोड स्थित एसई कार्यालय पर एसई, एक्सईएन, एसडीओ और जेई समेत 450 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी एकजुट हुए। उन्होंने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। साझा संघर्ष मोर्चा के नेताओं—बलजीत बैनीवाल, रविंद्र घनघस, सलाऊद्दीन, प्रदीप लौरा, विकास नेहरा और जसवंत ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने निजी कंपनी को दिया गया लाइसेंस रद्द नहीं किया, तो 24 अक्टूबर को बैठक कर इस हड़ताल को और व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा।

हड़ताल के आंकड़े: नदारद रहे कर्मचारी

हड़ताल का असर विभागों के कामकाज पर पूरी तरह साफ नजर आया। आंकड़ों के मुताबिक:

  • रेगुलर श्रेणी: कुल 544 में से 538 कर्मचारी (98.90%) अनुपस्थित रहे।
  • अनुबंधित श्रेणी: कुल 203 में से 198 कर्मचारी हड़ताल पर रहे।
  • कुल उपस्थिति: नियमित और अनुबंधित मिलाकर कुल 747 में से 736 कर्मचारी (98.53%) ड्यूटी से दूर रहे, जिससे पूरे सर्कल की विद्युत व्यवस्था ठप हो गई।

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कंट्रोल रूम बेहाल और जनरेटर चलाने वाला कोई नहीं

हड़ताल के कारण हिसार के मुख्य कंट्रोल रूम में पूरी तरह अंधेरा छा गया था। स्थिति संभालने के लिए निदेशक के आदेश पर ठेकेदार के कर्मचारी पहुंचे और जुगाड़ तकनीक (कुंडी लगाकर) से दो घंटे की मशक्कत के बाद बिजली बहाल की, तब जाकर कंप्यूटर से रिपोर्ट भेजने का काम शुरू हो सका। इसके अलावा, विद्युत सदन में कुछ कार्यालयों को रोशन करने के लिए जनरेटर तो मंगवाया गया, लेकिन उसे चालू करने वाला कोई भी कर्मचारी मौजूद न होने के कारण वह दिनभर यूं ही खड़ा रहा।

पानी को तरसे लोग, सड़कों पर उतरा जनसैलाब

बिजली आपूर्ति न होने के कारण घरों की मोटरें नहीं चल सकीं, जिससे हजारों लोग पेयजल के लिए तरसते नजर आए। स्थिति बिगड़ते देख नागरिकों का गुस्सा फूट पड़ा:

  • सेक्टर-13 और 33: दोपहर से गायब बिजली के कारण करीब 5 हजार लोग परेशान रहे। फोन न उठाने पर आक्रोशित लोगों ने सेक्टर-33 सब-स्टेशन के बाहर जाम लगा दिया और जमकर प्रदर्शन किया। मामला बढ़ता देख सीटीएम मौके पर पहुंचे और सुरक्षा बढ़ानी पड़ी।
  • बरवाला: बिजली न आने से गुस्साए शहरवासियों ने नेशनल हाईवे-52 पर बिजली बोर्ड के सामने जाम लगा दिया, जिसे बाद में पुलिस ने सूझबूझ से खुलवाया।

कानूनी पहलू: मूलभूत सुविधा बाधित करना जुर्म

अधिवक्ता अलका ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि कानून की दृष्टि से मूलभूत सुविधाओं को बाधित करना एक जुर्म है। दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम कर्मचारी आचरण नियमावली, 2006 के विनियम 25 और सेक्शन 4(क) के तहत सरकार के पास हड़ताल समाप्त कराने के लिए विशेष शक्तियां हैं। इसके साथ ही, सेक्शन 51(क) के तहत कोई भी निगम कर्मी हड़ताल नहीं कर सकता। यदि कोई ऐसा करता है या दूसरों को उकसाता है, तो उसे 3 साल तक की सजा हो सकती है।

प्रभावित क्षेत्र

हड़ताल और ब्लैकआउट के कारण हिसार के ग्रामीण और शहरी दोनों इलाके बुरी तरह प्रभावित हुए:

  • प्रमुख ग्रामीण क्षेत्र: गैबीपुर, चूली-मोढ़ाखेड़ा, अग्रोहा-नंगथला, मंगाली, भिवानी रोहिल्ला, चौधरीवास, आर्य नगर, जमालपुर, थुराना, मिर्चपुर, खरड़, अलीपुर, भाटला, उमरा, बास, मुंढाल, राजली, सदलपुर, स्याहड़वा समेत कई गांव।
  • प्रमुख शहरी क्षेत्र: नागोरी गेट, राजगुरु मार्केट, पुरानी सब्जी मंडी, सूर्य नगर, इंदिरा कॉलोनी, शांति नगर, आजाद नगर, पटेल नगर, जवाहर नगर, ऑटो मार्केट, पड़ाव चौक, 12 क्वार्टर रोड, मिल गेट, सेक्टर 1-4, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी और बस स्टैंड के आसपास का पूरा इलाका।

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