रांची।झारखंड में पिछले पांच सालों में हाथियों ने लगभग 254 से ज्यादा लोगों की जान ले ली है।हाल के कुछ सालों में हाथियों के हमले बढ़े है।कोल्हान और आसपास के क्षेत्रों में जंगली हाथियों ने अपने उत्पात से अधिक लोगो को परेशान कर रखा हैं।
हाथियों ने अपना उत्पात अधिकतर जिलों में मचाया है और कई घर तोड़े और फसलों को भी नुकसान पहुंचाया है।कोल्हान में सरायकेला-खरसावां, ईचागढ़, कुकड़ू एवं रांची जिले के अनगड़ी, बुंडू, तमाड़, सोनाहातु, सिल्ली, अनगड़ा दर्जनों गांवों के लोग हाथियों के उत्पात परेशान हैं।
सिंहभूम के जंगली हाथियों के प्राकृतिक आवास के लिए काफी मशहूर थे,लेकिन पिछले तीन दशक में हाथियों की प्राकृतिक आश्रयस्थली को बहुत हानि पहुंची है।इसका मुख्य कारण ज्यादा खनन होना है।सड़क और रेलवे लाइन का विस्तार व हाथियों के कॉरिडोर में आबादी का बसना भी एक बड़ा कारण है।इससे हाथियों का आना जाना प्रभावित होता है और यही वजह है कि जब जंगली हाथी झुंड के साथ निकलते हैं तो आदमियों से साथ भिड़ंत हो जाती है।
वन विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक पीके वर्मा कहते है कि हाथी-मानव संघर्ष को रोकने के खातिर वन विभाग ने क्विक रिस्पांस टीम गठित की है। टीम लोगों को जागरूक करती है और वैज्ञानिक और पारंपरिक तरीके से हाथियों को वापस जंगल की में भेजने के लिए कोशिश करती है।हाथियों के झुंड की गतिविधियों के बारे में जानकारी मोबाइल और रेडियो संदेश के जरिए लोगों को दी जाती है।
आपको बता दें कि हाथियों द्वारा किए गये हमले के शिकार लोगों को मुआवजा दिया जाता है।इसके तहत मौत होने पर चार लाख रुपये, घायल होने पर 15 हजार से एक लाख रुपये तक देने का प्रविधान है। हमले में स्थायी अपंग होने पर दो लाख रुपये, फसल के नुकसान पर 20 से 40 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा दिया जाता है।
वर्ष मृत्यु घायल
2016-17 59 139
2017-18 78 155
2018-19 25 43
2019-20 60 55
2020-21 32 58





