रांची।झारखंड हाईकोर्ट से छठी जेपीएससी के सफल उम्मीदवारों को फिलहाल राहत मिली है और वे अभी नौकरी में बने रहेंगे।मंगलवार को चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने अगले आदेश तक यथास्थिति बनाए रखने के लिए निर्देशित किया है।हाईकोर्ट ने एकलपीठ में मेरिट लिस्ट को चुनौती देने वाले सभी प्रार्थियों को इस मामले में प्रतिवादी बनाने के लिए नोटिस जारी करने का निर्देश दिये हैं।अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।एकलपीठ ने सात जून को छठी जेपीएससी की मेरिट लिस्ट को रद्द करते हुए सरकार को आठ सप्ताह में नयी मेरिट लिस्ट जारी करने का निर्देश दिया था।इस आदेश से 100 से अधिक सफल उम्मीदवारों की नौकरी पर खतरे के बादल छाये थे। इसके बाद 140 सफल उम्मीदवारों ने हाईकोर्ट में एकलपीठ के आदेश के खिलाफ अपील दायर की, जिसपर मंगलवार को सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का निर्देशित किया था।

सफल अभ्यर्थियों की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरीय अधिवक्ता प्रशांत भूषण, वरीय अधिवक्ता अनिल कुमार सिन्हा और सुमित गाड़ोदिया ने पक्ष रखते हुए कहा कि पेपर वन (हिंदी और अंग्रेजी) का अंक कुल प्राप्तांक में जोड़ा जाना सही है। यह दोनों क्वालीफाइंग पेपर हैं, क्योंकि इसमें निर्धारित न्यूनतम अंक लाने वाले को ही पास माना जाएगा, भले ही वे दूसरे अन्य पेपर में फेल हों। जेपीएससी ने पेपर-वन के अलावा किसी भी अन्य पेपर में न्यूनतम अंक लाने की शर्त नहीं लगाई है।

अदालत को बताया गया कि जेपीएससी ने विज्ञापन में ही 1050 अंक निर्धारित किए हैं। इसमें पेपर-वन को जोड़ने के बाद ही कुल प्राप्तांक 1050 के बराबर होता है। अगर पेपर-वन के अंक को हटा दिया जाए, तो निर्धारित 1050 से कम यानी 950 अंक ही आते हैं, इसलिए जेपीएससी के द्वारा मुख्य परीक्षा के परिणाम में उनके मार्क्स जोड़ा जाना उचित है।



सरकार एकलपीठ के आदेश से सहमत

सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि राज्य सरकार ने एकल पीठ के आदेश के पालन का निर्णय लिया है। इसी कारण सरकार की ओर से अपील दाखिल नहीं की गई है। जेपीएससी ने भी राज्य सरकार के निर्णय पर सहमति जताई। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि एकल पीठ में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने जेपीएससी के स्टैंड का बचाव किया था, लेकिन अब वह अपील में तटस्थ हो गई है।



जाने क्या है एकलपीठ का आदेश



एकल पीठ ने छठी जेपीएससी की मेरिट लिस्ट को रद्द करते हुए दोबारा संशोधित मेरिट लिस्ट जारी करने का निर्देश दिया था। अदालत ने माना था कि कि पेपर वन (हिंदी व अंग्रेजी) के क्वालिफाइंग मार्क्स को कुल प्राप्तांक में नहीं जोड़ा जा सकता है। यह विज्ञापन की शर्तों के विपरीत है। अदालत ने इस मामले के लिए जिम्मेदार जेपीएससी के पदाधिकारियों पर कार्रवाई करने का भी आदेश दिया था। इस आदेश से प्रभावित होने वाले 140 से ज्यादा चयनित अभ्यर्थियों की ओर से अपील दाखिल कर एकल पीठ के आदेश को निरस्त करने की मांग की थी। याचिका में कहा गया था कि जेपीएससी की ओर से जारी मेरिट लिस्ट में कोई त्रुटि नहीं है।