नई दिल्ली।

केंद्र सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट से पत्रकारों और मीडिया संस्थानों के कामकाज में कोई बाधा नहीं आने दी जाएगी। शुक्रवार को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि सरकार इस कानून के तहत बनने वाले नियमों में बदलाव करने के लिए पूरी तरह तैयार है। यदि आवश्यक हुआ तो मीडिया की स्वतंत्रता को सुरक्षित रखने के लिए खुद मूल कानून में संशोधन करने से भी पीछे नहीं हटा जाएगा।

डेटा फिड्यूशियरी और मीडिया में अंतर: अश्विनी वैष्णव

मामले पर स्पष्टीकरण देते हुए केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को कहा कि डीपीडीपी अधिनियम की धारा 7 मुख्य रूप से बैंकों, टेलीकॉम कंपनियों और बीमा कंपनियों जैसी संस्थाओं ('डेटा फिड्यूशियरी') के लिए बनाई गई है।

उन्होंने स्पष्ट किया:

  • मीडिया दायरा से बाहर: पत्रकार और मीडिया हाउस 'डेटा फिड्यूशियरी' की श्रेणी में नहीं आते हैं, इसलिए यह नियम उन पर सीधा प्रभाव नहीं डालते।
  • संवैधानिक प्रतिबद्धता: सरकार संविधान द्वारा नागरिकों को दी गई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Expression) के मौलिक अधिकार को बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

क्या है विवाद और सुप्रीम कोर्ट का रुख?

केंद्र सरकार का यह बयान उस समय आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) की याचिका पर सुनवाई करने की सहमति जताई है।

  • 21 प्रमुख मीडिया संस्थानों की चुनौती: देश के 21 बड़े डिजिटल न्यूज मीडिया संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाले DNPA ने DPDP एक्ट और इसके तहत बने नियमों के कई प्रावधानों की वैधता को अदालत में चुनौती दी है।
  • संविधान उल्लंघन का आरोप: एसोसिएशन का तर्क है कि कानून में मीडिया हाउसों के लिए स्पष्ट छूट (Exemption) न होने से यह पत्रकारों की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाता है और खोजी पत्रकारिता (Investigative Journalism) के लिए खतरा पैदा कर सकता है।

इसे भी पढ़ेंः फॉर्म-6 पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी से बढ़ीं CEC ज्ञानेश कुमार की मुश्किलें, 19 विपक्षी दलों का सड़क पर संग्राम

नियमों और कानून में सुधार का आश्वासन

मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने पत्रकारों की इन आशंकाओं को दूर करते हुए कहा:

"डीपीडीपी एक्ट का उद्देश्य नागरिकों की निजता के अधिकार की रक्षा करना और डेटा रखने वाली संस्थाओं की जिम्मेदारी तय करना है। यदि मीडिया जगत को लगता है कि इससे उनके काम में रुकावट आएगी, तो नियमों में तुरंत संशोधन किया जा सकता है। नियमों की कानूनी शक्ति भी अधिनियम के बराबर ही होती है, और जरूरत पड़ने पर हम एक कदम आगे बढ़ाकर कानून में भी संशोधन करेंगे।"

सरकार के इस रुख से स्पष्ट है कि प्रेस की स्वतंत्रता और डिजिटल डेटा सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए नियमन प्रक्रिया में आवश्यक ढील और स्पष्टता दी जाएगी।

#DPDPAct #PressFreedom #UnionGovernment #AshwiniVaishnaw #MediaNews #SupremeCourt #DataProtection #BreakingNewsHindi