नई दिल्ली में आयोजित टाइम्स नेटवर्क डिफेंस कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सीमा पार से भविष्य में होने वाली किसी भी आतंकी हरकत का भारत पहले से कहीं अधिक कड़े और निर्णायक तरीके से जवाब देगा।
"शांति हमारी प्रतिबद्धता, पर कमजोरी नहीं"
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपरा हमेशा से संवाद, सह-अस्तित्व और शांतिपूर्ण समाधान की रही है, लेकिन शांति के प्रति हमारी इस प्रतिबद्धता को कभी भी हमारी कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए।
उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर, बालाकोट एयरस्ट्राइक और सर्जिकल स्ट्राइक का विशेष उल्लेख करते हुए इन्हें भारत की रक्षा नीति में आए ऐतिहासिक बदलाव का प्रतीक बताया। राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत अब केवल कूटनीतिक विरोध तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आतंकवाद के स्रोत तक पहुंचकर उसे जड़ से खत्म करने के लिए सक्रिय कदम उठाता है।
सुरक्षा के बदलते खतरे और 'स्मार्ट पावर' पर जोर
बदलते वैश्विक और तकनीकी परिदृश्य पर चर्चा करते हुए रक्षा मंत्री ने आधुनिक सुरक्षा के पांच प्रमुख खतरों—डिसइन्फॉर्मेशन (गलत सूचना), डेस्टेबलाइजेशन (अस्थिरता), डिसरप्शन (बाधा), डिसेप्शन (धोखा) और डिस्ट्रक्शन (विनाश) का जिक्र किया।
इसके साथ ही उन्होंने निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया:
- लोन वुल्फ अटैक और व्हाइट कॉलर आतंकवाद: आतंकवाद अब केवल संगठित समूहों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि अकेले हमला करने वाले कट्टरपंथियों से भी नए खतरे पैदा हो रहे हैं।
- स्मार्ट पावर का समन्वय: पारंपरिक हार्ड पावर और सॉफ्ट पावर के तालमेल से 'स्मार्ट पावर' की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत है, जिसमें आधुनिक सटीक हथियारों के साथ कम लागत वाली और उन्नत तकनीकों का समावेश हो।
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रक्षा उत्पादन में ऐतिहासिक उछाल और आत्मनिर्भरता
स्वदेशी रक्षा उत्पादन के आंकड़ों को साझा करते हुए राजनाथ सिंह ने गर्व से बताया कि देश की रक्षा क्षमताएं तेजी से आत्मनिर्भर हो रही हैं:
- बढ़ता उत्पादन: 2014 के 40,000 करोड़ रुपये की तुलना में आज देश का रक्षा उत्पादन बढ़कर रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। सरकार का लक्ष्य इस साल 2 लाख करोड़ और 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये तक पहुँचाने का है।
- निर्यात में वृद्धि: भारत का रक्षा निर्यात अब 39,000 करोड़ रुपये तक पहुँच चुका है और भारतीय उत्पाद दुनिया के लगभग 100 देशों तक पहुँच रहे हैं।
- गोला-बारूद और उपकरण: भारतीय सेना के इस्तेमाल में आने वाले 175 प्रकार के गोला-बारूद में से 159 का निर्माण अब देश में ही हो रहा है, जिससे इस क्षेत्र में 90% से अधिक आत्मनिर्भरता हासिल हो चुकी है। इसके अलावा, भारत 100 से अधिक देशों को बुलेटप्रूफ जैकेट का निर्यात भी कर रहा है।
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