वाराणासी।दीपावली के बाद आध्यात्मिक नगरी काशी के लोगों का देव दीपावली की इंतजार की घड़ियां खत्म हो गई।मास भर चलने वाले कार्तिक पूर्णिमा में विष्णु भगवान की पूजा करने वाले भक्तों ने शुक्रवार को सूरज डूबने के बाद बाबा भोलेनाथ की नगरी काशी को दीपों की रोशनी से जगमग कर दिया।सबसे पहले पंचगंगा घाट पर देव दीपावली की शुरुआत होने की परंपरा को निभाते हुए रानी अहिल्याबाई के हाथों स्थापित हजारा दीप जलाया गया।इसके बाद आध्यात्मिक नगरी काशी में देव दीपावली उत्सव की शुरुआत हो गई।

आपको बता दें कि आध्यात्मिक नगरी काशी के लोगों ने बाबा भोलेनाथ की नगरी काशी के देवालयों, तालाब, सरोवर, कुंड हर जगह देवताओं की दीपावली के मौके पर दीपों की आकर्षक सजावट की।इस दौरान रोशनी से 33 करोड़ देवी-देवताओं का महादेव की नगरी में स्वागत किया गया।
अर्धचंद्राकार स्वरूप गंगा घाट पर जब दीपों की रोशनी ने अपनी छटा बिखेरी तो ऐसा लगा कि चांद-सितारों से सजा आसमान धरती पर उतर आया है।देव दीपावली के पावन अवसर पर भगवान वि‍ष्‍णु देवाधिदेव महादेव के आग्रह पर 33 करोड़ देवी-देवताओं के साथ पधारे तो आध्यात्मिक नगरी काशी भी स्वागत करने के लिए उमड़ पड़ी।आध्यात्मिक नगरी काशी के लोगों ने मंदिरों, घाटों समेत कई स्थानों पर दीपों के साथ दीपावली मनानी शुरू कर दी।अदृश्य रूप से उपस्थित सभी देवी-देवता देव दीपावली के दिन महादेव के साथ काशी की धरती पर दीपावली मनाते हैं।आध्यात्मिक नगरी काशी के लोग देव दीपावली पर देवालयों और घाटों की सजावट कर मां गंगा और काशी विश्वनाथ के साथ दीपावली मनाते हुए महाआरती करते हैं।चारों तरफ रोशनी ही दिखाई दी।

मां गंगा भी देव दीपावली के पर रोशनी से सराबोर दिखाई दी।आसमान से चांद तारे भी नीचे निखरी रोशनी को देखते मिले।
कार्यक्रम के दौरान राजेंद्र प्रसाद गंगा सेवा समिति ने प्रख्ताय गायिका अनुराधा पौडवाल को सम्मानित किया।उन्हें स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।