नई दिल्ली / अंतरराष्ट्रीय बाजार

कच्चे तेल (Crude Oil) के दाम अपने छह महीने के सबसे ऊंचे स्तर के करीब पहुँचने के बाद सोमवार को 2 प्रतिशत तक लुढ़क गए। सऊदी अरब पर लगातार जारी हमलों और भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद ब्रेंट क्रूड में यह नरमी देखने को मिली है।

सोमवार के कारोबार में WTI क्रूड 2.11% (यानी 2.17 डॉलर) टूटकर 101.09 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि ब्रेंट क्रूड 1.85% (यानी 2.16 डॉलर) सस्ता होकर 114.5 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। बाजार में इस अचानक आई गिरावट के पीछे शुक्रवार की बड़ी तेजी के बाद मुनाफावसूली और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आगामी नीतिगत फैसलों से पहले निवेशकों की सतर्कता को मुख्य वजह माना जा रहा है।

सोमवार को क्यों गिरे दाम? (शुक्रवार की तेजी के बाद ठहराव)

पिछले सप्ताह हूती विद्रोहियों के हमलों के डर से तेल के दामों में जबरदस्त उबाल आया था। पूरे हफ्ते के दौरान ब्रेंट क्रूड में 6% और WTI में 2.3% की तेजी दर्ज की गई थी, जिसके बाद सोमवार को बाजार में थोड़ा ठहराव और करेक्शन देखने को मिला। इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) के आने वाले पॉलिसी फैसलों पर टकटकी लगाए बैठे निवेशकों ने जोखिम भरे सौदों से फिलहाल दूरी बनाई है।

सऊदी अरब पर वीकेंड में भी जारी रहे हमले, सप्लाई को लेकर डर बरकरार

भले ही सोमवार को कीमतों में हल्की राहत मिली हो, लेकिन वैश्विक तेल बाजार में संकट के बादल छंटे नहीं हैं:

  • हूती विद्रोहियों के हमले: शनिवार और रविवार को सऊदी अरब के कई हिस्सों में हालात तनावपूर्ण रहे। विद्रोहियों ने एयरपोर्ट और तेल ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया।
  • सऊदी सुरक्षा का कड़ा पहरा: दूसरी तरफ, सऊदी अरब ने पुष्टि की कि उसने कई मिसाइलों और ड्रोनों को हवा में ही नाकाम कर दिया। हालांकि, लगातार हो रहे इन हमलों से वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति बाधित होने का भय बना हुआ है।

क्या 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच जाएगा भाव?

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में तेल की चाल पूरी तरह से 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) के समुद्री रास्ते और तेल ठिकानों की सुरक्षा पर निर्भर करेगी।

  • विशेषज्ञों की राय: रेलिगेयर ब्रोकिंग के रिसर्च सीनियर वीपी अजीत मिश्रा का कहना है कि बाजार का रुख तेजी का ही है, लेकिन यह पूरी तरह से रोजाना आने वाली खबरों पर चल रहा है। उन्होंने ट्रेडर्स को अचानक आने वाली तेजी के पीछे भागने से बचने और वैश्विक तनाव व फेड के संकेतों पर नजर रखने की सलाह दी है।
  • बड़ा खतरा: मोतीलाल ओसवाल के कमोडिटीज हेड नवनीत दमानी के अनुसार, अमेरिका और इजरायल द्वारा 3 नवंबर के अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान के ऊर्जा व परमाणु ठिकानों पर हमले की योजना की खबरों ने बाजार के डर को और बढ़ा दिया है। यदि होर्मुज की शिपिंग या तेल ठिकानों पर कोई बड़ी बाधा आती है, तो ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकता है।

सप्लाई बढ़ाने के तमाम दावे क्यों साबित हुए नाकाफी?

कीमतों को नियंत्रित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किए जा रहे प्रयास अब तक बेअसर साबित हुए हैं:

  1. IEA और G7 के कदम: अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के इमरजेंसी स्टॉक से तेल निकालने और G7 देशों द्वारा 100 मिलियन बैरल अतिरिक्त तेल बाजार में छोड़ने की घोषणाओं का तुरंत बड़ा असर नहीं दिखा है।
  2. शिपिंग और ट्रांसपोर्ट की समस्या: भले ही समुद्री रास्ते पर आवाजाही में हल्का सुधार हुआ है, लेकिन बढ़ा हुआ शिपिंग किराया और सुरक्षा खतरे एक्सपोर्ट पर भरोसा कम कर रहे हैं। जब तक जमीनी स्तर पर सप्लाई पूरी तरह सामान्य नहीं होती, तब तक कीमतों में उच्च स्तर बना रहने की पूरी आशंका है।

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