रांची।देश में कोयला का संकट उद्योगों के लिए भी किल्लत बनता जा रहा है। कोयले की चुनिंदा बिक्री उद्योगों को भी बड़ी मार,मार रहा है।बिजली संकट को देखते हुए कोयला आपूर्ति बिजली क्षेत्र को प्राथमिकता दी जा रही है।इससे सीमेंट, स्टील, एल्यूमीनियम,तांबा और जिंक समेत तमाम धातुओं वाले कारखानों में उत्पादन घटने लगा है और इनकी कीमतों में बढ़ोतरी होने लगी है।
कोल इंडिया ने कोयला संकट देखते हुए गैर बिजली उत्पादकों को कोयला देना रोक दिया है।गैर बिजली उत्पादकों को कोयला न मिलने से कई धातुओं की कीमत मेटल एक्सचेंज पर 13 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। एल्युमीनियम एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने आगाह किया कि एल्युमीनियम संयंत्रों में कोयले की देना तुरंत नहीं शुरू किया गया तो आठ लाख से ज्यादा लोगों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा।बैंकों का एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज चढ़ जाएगा और 90,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राष्ट्रीय विदेशी मुद्रा का नुकसान भी होगा।
ईंट भट्ठों वाले कोयले का भाव सात हजार रुपये प्रति मीट्रिक टन से 22 हजार रुपये हो गया है।इससे देश के कई राज्यों में ईंट भट्ठे इस सीजन में अभी तक चालू नहीं हो सके हैं और ईंटे के दाम 1500 से 1700 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है।
फ्रोजन फ्रूड उद्योग पर बिजली संकट सबसे ज्यादा प्रभाव डाल सकता है। बिजली कटौती की हालत ये है कि उद्योग जनरेटर पर विश्वास कर सकता है, और डीजल महंगा होने के कारण उनकी लागत काफी हद तक बढ़ जाएगी।
बिजली उत्पादन संयंत्रों में कोयले के कम भंडार के बीच कोल इंडिया ने अपनी सहायक कंपनियों से स्थिति सामान्य होने तक बिजली क्षेत्र के लिए विशेष फॉरवर्ड ई-नीलामी को छोड़कर कोयले की किसी भी तरह की ई-नीलामी आयोजित करने से परहेज करने के लिए कहा है।





